सच्चा प्रेम पाने में नहीं, बल्कि केवल प्रियतम के सुख में अपना सुख खोजने में है। गोपियों का निष्काम प्रेम त्याग, समर्पण और निस्वार्थ भक्ति की ऐसी पराकाष्ठा है कि स्वयं श्रीकृष्ण भी उसके स्मरण से महाभाव में डूब जाते हैं।
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