इस विराट सृष्टि से परे द्वारकाधीश श्रीकृष्ण के दिव्य स्वरूप का ध्यान कीजिए। रुक्मिणी-कृष्ण की आराधना करते हुए उनके सौंदर्य, ऐश्वर्य और दिव्य कृपा का मनन करें। यह ध्यान आत्मा को सांसारिक सीमाओं से ऊपर उठाकर भक्ति, श्रद्धा और भगवान से अपने शाश्वत संबंध की अनुभूति कराता है।