हम अपने कर्म भगवान को कैसे अर्पित करें? इसका आधार है — हमारा भाव। जब हमारा भाव हो कि “यह मैं उनके सुख के लिए कर रहा हूँ,” तब हमारा कर्म स्वतः ही भगवान को समर्पित हो जाता है।

हम अपने कर्म भगवान को कैसे अर्पित करें? इसका आधार है — हमारा भाव। जब हमारा भाव हो कि “यह मैं उनके सुख के लिए कर रहा हूँ,” तब हमारा कर्म स्वतः ही भगवान को समर्पित हो जाता है।

FREE Yourself From Suffering - Shree Krishna's Life-Changing Promise to You05 Dec 2025